अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें, ध्यान दें अधिकारी और नेता लोक सेवक हैं, इन्हें हम पर आदेश चलाने का कोई अधिकार नहीं है.

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क्या कुछ देखा.??...

>> Tuesday, 10 March 2009



चौंकिए मत...... यह कहीं और का चित्र नहीं........ बस रात के समय सीतापुर से वापस आते समय हरगोविंद चौराहे(बिसवां तिराहे) का है जिसे देख कर लहरपुर का एहसास होता है... देख लो कि कहीं लखनऊ बनने के चक्कर में हम अपनी जड़ों से दूर तो नहीं हो रहे.... ऊपर वाला न करे कि कभी हम एक दूसरे के लिए उतने अजनबी हो जायें जैसे कि लखनऊ में लोग होते हैं.... जड़ों से जुडें... बस इतना सा खवाब ही तो है..............

3 टिप्पणियाँ:

Sachin 10 March 2009 at 09:43  

this is really cool view.....
I am really very happy to see this picture. Thanks a lot Ashu Bhaiya for letting me know about our great laharpur's progress.....

sim 10 March 2009 at 12:22  

very nice picture. ekbar to ykin hi nahi hua ki y laharpur ke tirahe ki picture hai . i m so happy to see this view

डा०आशुतोष शुक्ल 12 March 2009 at 21:18  

धन्यवाद... आप लोगों को यहाँ की सामग्री अच्छी लग रही है. अपना स्नेह इसी तरह से बनाये रखें क्योंकि आपकी टिप्पणी हमें और अच्छा करने की प्रेरणा देती रहेंगीं.

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