क्या कुछ देखा.??...
>> Tuesday, 10 March 2009
चौंकिए मत...... यह कहीं और का चित्र नहीं........ बस रात के समय सीतापुर से वापस आते समय हरगोविंद चौराहे(बिसवां तिराहे) का है जिसे देख कर लहरपुर का एहसास होता है... देख लो कि कहीं लखनऊ बनने के चक्कर में हम अपनी जड़ों से दूर तो नहीं हो रहे.... ऊपर वाला न करे कि कभी हम एक दूसरे के लिए उतने अजनबी हो जायें जैसे कि लखनऊ में लोग होते हैं.... जड़ों से जुडें... बस इतना सा खवाब ही तो है..............

